रविवार, 6 अगस्त 2017

निर्मल गुप्त की कविताएँ : गुलाबी छतरी वाली लड़की

निर्मल गुप्त की कविताएँ : गुलाबी छतरी वाली लड़की: बंद खिड़की से छन कर चला आया अनचीन्ही खुशबु का झोंका जाती है शायद किसी पीर की शाही सवारी  खिड़की खोली तो दिखी गुलाबी छतरी वाली बरसात और...

चश्मा ,चाभी ,पेन और मेरा वजूद

मैंने अपने चश्मे को डोरी से बांध लटका लिया है गले में जैसे आदमखोर कबीले के सरदार आखेट किये नरमुंड लटकाते होंगे चश्मा जिसे मैं प्यार से ऐनक...