गुरुवार, 7 मार्च 2013

नींद

नींद
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मुझे नींद चाहिए
एकदम नकद मेहनत से कमाई हुई
किसी भिखारी के कटोरे में पड़ी
हिकारत के सिक्कों के तरह मिली नहीं
किसी रसायन के रहमोकरम से उपजी
आधी अधूरी नींद भी नहीं
मुझे नींद अपनी शर्तों पर चाहिए
वह मिले तो मिले
नहीं तो जागते रहने की जिद के साथ
मर जाने में आखिर हर्ज क्या है ?

केदार जी को याद करते हुए----

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