रविवार, 25 अक्तूबर 2015

मम्मा और उसका बेटा

मम्मा  बदहवास है
बच्चा गहरी नींद में है
उसके होंठों पर थिरक रही है 
दुनिया की  पवित्रतम मुस्कान
माँ को ऑफिस पहुँचने की जल्दी है  
चैन से साँस तक लेने फुरसत नहीं.

समय तेजी से भाग रहा है
कच्चा हुआ जाता है मम्मा  का मन
वह तुरंत रो देना चाहती है
बच्चा नन्हे नन्हे हाथ पैर हिला कर
उसे  देता है  दिलासा
आप जाओ काम पर बेफिक्र.

बच्चा दिन भर हँसता खेलता है
खूब करता है ठिठोली
आपको देखता है तो रोने लगता है
क्रेच वाली बहलाती है
बच्चा माँ की गोद में दुबक कर
अपना सिर धीरे धीरे  हिलाता है.

गोद में बच्चे को लिए
घर वापस जाती मम्मा  
पूरे रास्ते बतियाती है उससे
बीच बीच में पूछती जाती  है सवाल
मम्मा काम पर न जाए
तो तू खूब खेलेगा उसके  साथ.

बच्चा घर आकर खूब किलकता है
मम्मा  की नाक को छू छू कर
जताता है बेपनाह प्यार
वह हुम हुम कर कुछ कहता है उससे
वह  समझती  है उसकी हर बात
उसके बिना क्रेच में वह कितना रोता होगा.

बस तू ज़रा-सा  बड़ा हो जा
फिर तू यहीं रहेगा मम्मा के पास
बस्ता लेकर स्कूल जाएगा
बस्ता और नर्म परांठे लेकर  
तब हम खूब मस्ती करेंगे साथ साथ  
मम्मा के पास दुलार भरा  सपना है.

बच्चा मम्मा  से बेतरह लिपटा
मानो समझ रहा है सारी बात
वह भी समझ रही है सब  
लेकिन आज वह निश्चिंत है
कल छुट्टी है पर परसों...
दोनों मगन हैं परसों से मुंह फेरे हुए.  

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