शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

ईद : कुछ शब्द चित्र

ईद आई है बड़ी मन्नतों के बाद 
बारिश आ गई बिन बुलाए 
कभी कभी खुशियों के संग 
कौन कौन आ जाता है .
+++
मैंने कहा ईद मुबारक 
उसने अचकचा के देखा 
कभी कभी मौहब्बत भी 
मज़हब पूछती है 
+++
इतनी सारी मुबारकबाद
इन्हें कहाँ रखूं सहेज कर
कभी कभी दिल भी
कितना छोटा पड़ जाता है .
+++
माँ हर बरस देती थी 
हमें ईद पर ईदी 
कभी कभी माओं से 
कोई उनका धर्म नहीं पूछता .
+++
मैंने कहा चाँद निकल आया है 
माँ खामोश रही 
कभी कभी खुशखबरी भी 
कितना उदास कर जाती है
+++
अम्मी चली गई
हामिद का चिमटा रसोई में है
कभी कभी ईदगाह की
रसोई को हरदम याद आती है .*

*
प्रेमचन्द की कहानी ईदगाह को याद करते हुए
+++
ईद आती है तो खुशियाँ 
सेवैय्यों के साथ आ जाती हैं
कभी कभी ईद भी 
दीवाली सी हो जाती है .
+++
एक घर में खुशियाँ हैं 
दूसरे में मुफलिसी 
कभी कभी खाली बर्तनों में ईद 
उदास धुन की तरह बजती है .


.
Top of Form




सपने और सपने में फ़र्क

मेरी नींद के भीतर तमाम चिड़ियों को चोटिल करने के बाद एक थका हुआ बच्चा गुलेल को सीने पर टिका चैन की नींद सोता हौले से मुस्कराता...