सोमवार, 5 अगस्त 2013

बारिश : कुछ शब्द चित्र


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एक ओर बारिश है 
दूसरी ओर धूप खिली है 
कभी कभी मौका होता है 
अपने अपने सपने चुनने का .
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बारिश की बौछारों ने 
बिखरा दिए सारे गुलाब 
कभी कभी आवारा गंध 
फिर भी महकती है .
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क्यों झुठला रहे हो उम्र को 
बारिश में भीग कर 
कभी कभी फरेब भी 
मन बहला जाता है .
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न तो बारिश थमी 
न भीगने से मन भरा 
कभी कभी तरबतर होने के लिए 
देह थोड़ी पड़ जाती है .
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तुम्हारे सारे नम्बर 
मेरे मोबाईल से नदारद हैं 
कभी कभी बारिश भी 
खूब शरारत करती है .
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आओ चलो नहा लें 
बारिश के पानी में 
कभी कभी कुछ ख्वाईशें
यादों के वर्षा वन में ले जाती हैं .