शुक्रवार, 2 अगस्त 2013

कभी कभी

अकसर
तुम्हारे आने की आहट पर
मेरी सांसें थम जाती हैं
कभी कभी दबे पाँव भी आया करो .
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उसके आने की कोई खबर तो न थी
मैं तकता रहा उसकी राह देर तक
कभी कभी इंतजार भी
कितना पुरसुकून होता है .
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बारिश की पहली बूँद
चुपके से आ गिरी मेरी हथेली पर
कभी कभी देह से पहले
मन भीग जाता है .
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मुझे विदा करने
उसके आंसू आये आँख तलक
कभी कभी जिंदगी में तूफ़ान
ऐसे भी आता है .
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उसे यकीन था
मैं लौट कर आऊंगा उसके पास
कभी कभी परिंदे भी
अपना घर भूल जाते हैं .
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मेरी तन्हाई बड़ी बातून है 

जाने क्या क्या कह देती है
कभी कभी ख़ामोशी भी
बड़ी सनसनीखेज़ होती है .

खोया -पाया

मुझे आज अलस्सुबह पुराने दस्तावजों के बीच एक जर्द कागज मिला दर्ज थी उस पर सब्ज रंग की आधी अधूरी इबारत वह प्रेमपगी कविता नहीं थी, शायद या ...