मंगलवार, 22 सितंबर 2015

जिन्दा बचे लोग


जो अभी तक जिन्दा बचे हैं  
उनके पास हैं मर जाने के तमाम कारण
लेकिन नहीं है जीवित बने रहने लायक
एक भी सार्थक सपना
और तो और इनके पास नहीं है
अपने जिन्दा होने का एक भी प्रामाणिक सुबूत.

जो अभी तक जिन्दा बचे हैं
उनको मारने के लिए दी गई सुपारी
निगल ली है भाड़े के हत्यारों ने
अपने निखट्टूपन से उकता कर
इनके बने  रहने की शायद
यही एकमात्र तार्किक वजह है.

जो अभी तक जिन्दा बचे हैं
अपनी जान की खैर मनाते
उन लोगों की कायरता की रोज खिल्ली उड़ाते हैं
जो मर डाले गए देखते ही देखते
और मुकाबले के लिए मुट्ठियाँ भी न बाँध पाए
बस ताकते रहे टुकुर टुकुर आसमान की ओर.

जो अभी तक जिन्दा बचे हैं
उनको मार डालने के तरीकों की
हो रही है सघन पड़ताल
धर्मग्रंथों के पीले पन्नों में
और ये ढूंढ रहे हैं अपना मुकद्दर
तर्कशास्त्र की पेचीदा गलियों के मानचित्रों में..

जो अभी तक जिन्दा बचे हैं
टकटकी लगाये बैठे है
द्रव्य की अविनाशिता के सिद्धांत पर
चमत्कारों के विज्ञान सम्मत होने का
सघन आशावाद लिए
हत्यारों के लिए इनकी जिंदगी तमाशा भर है.