मंगलवार, 15 सितंबर 2015

बच्चे का सिक्का


बच्चे ने डाला सिक्का
मिट्टी की गुल्लक की दरार में
वह बिना खनक के खो गया 
उसके अंदर के अँधेरे में
उसका सिक्का करेंसी बनेगा एक दिन
बच्चे कैसे कैसे मुगालते पाल लेते हैं .
बच्चे ने डाला सिक्का
गरीब की हथेली पर
वह उसे आशीष देता चला गया
जिधर से आया था उधर
गरीब अब उतना गरीब नहीं रहेगा
बच्चे का आशावाद कितना बचकाना होता है.
बच्चे ने डाला सिक्का
दुकानदार के सामने
उसने पूछा कि क्या दूं इसका
इससे तो एक टॉफी तक का मिलना
अब मुमकिन नहीं
बच्चे नाराज होते हैं तो बस मुहँ बिचका देते हैं.
बच्चे ने डाला सिक्का
बाज़ार की दहलीज पर
इस उम्मीद के साथ
वह अपने साथ ले आएगा
तमाम ऐशोआराम
बच्चे साहूकार बनने की जल्दी में होते हैं .
बच्चे ने डाला सिक्का
परती पड़ी गीली धरती पर
सोचा कि इससे उगेगा पौधा
पौधा पेड़ बनेगा
फल की जगह धन देगा
बच्चे बड़ों जैसे सपने क्यों देख लेते हैं.

खोया -पाया

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