शुक्रवार, 18 सितंबर 2015

लड़का और सवाल

घर की ओर जाने वाली रेलगाड़ी का
इंतज़ार करती औरत से
लड़का लगातार पूछे जा  रहा है
हमारे वाली रेल कब आएगी
लड़का सवाल बहुत पूछता है
औरत के पास जवाबी चुप्पी है.

धरना देने के लिए सुबह
वे ले जाए गए थे  राजधानी  
आदमी नेता के साथ उलझा था
भीड़ जुटाने के मोलतोल में
लड़का हैरान था यह सोचकर
हम वहां जाकर क्या करेंगे ,क्या कर लेंगे.

लड़का करना चाहता है ढेर सारी पढ़ाई
न उसके पास किताब है न कॉपी
न पैन न पेंसिल न फीस न तिकड़म
न स्कूल जाने लायक फुरसत
बस हैं कंचों जैसे  गोलमटोल सवाल 
लड़का उन्हीं से रात दिन खेलता है .

आदमी औरत से रोज कहता है
मोढा पूछताछ बहुत करता है
औरत कहना चाहती है
ये मरा तो जन्म से ऐसा ही  है
जुबान लड़ाने के जुर्म में पिटने के डर से
औरत अपनी ख़ामोशी में हौले से मुस्कुराती है .