शुक्रवार, 11 सितंबर 2015

खबरनवीस

वह अजीब सा खबरनवीस है
दिन रात बीनता फिरता है खबरें
हत्या बलात्कार चोरी डकैती की
दुर्घटनाओं का साक्षी बनता
बारात और वारदात को
एक ही तरीके से सनसनीखेज़ बनाता. .


वह अजीब सा खबरनवीस है
पोस्टमार्टम को पीएम
प्रेस कांफ्रेंस को पीसी
अपने कम्पयूटर को मशीन
और खुद को अखबार मालिक के
कारखाने का पुर्जा बताता .


वह अजीब सा खबरनवीस है
सपने में भी सिर्फ हादसे देखता
हर अफवाह के पीछे दौड़ लगाता
गड़े हुए मुर्दे उखाड़ता
और उसे एक्सक्लूसिव बता कर
ब्रेकिंग न्यूज़ देता हुआ इतराता .


वह अजीब सा खबरनवीस है
360 डिग्री पर आँख घुमाता है
उल्लू की तरह आधी रात तक
गली कूंचों पगडंडियों पर उड़ान भरता
शब्दों से चटपटी स्टोरी और
खबरों के लिए मनभावन व्याकरण गढता .


वह अजीब सा खबरनवीस है
रात भर जागता
दिन चढ़े तक सोता
नींद पूरी न हो पाने की
किसी से शिकायत नहीं करता
वहाट्सअप के चुटकले पढ़ कर हंसता .


वह अजीब सा खबरनवीस है
खबरों के बीच रहते रहते
उन्हें ही रात दिन ओढ़ते बिछाते
उन पर धर कर भजिया खाते खिलाते
वह खुद ही बन चुका है
एक अखबार का आधा अधूरा पन्ना .


वह अजीब सा खबरनवीस है
बड़ी बड़ी बातें बनाता है
लेकिन रोज भूल जाता है
अपनी लगातार कंकाल बनती बीवी को
डॉक्टर को दिखाना
और बच्चों का स्कूल में दाखिला कराना .


वह अजीब सा खबरनवीस है
हर समय जल्दी में रहता है
उसके बच्चे बिना अक्षर ज्ञान किये
बड़े होते जा रहे हैं
वे पानी को पप्पा कहते हैं
और रोटी को अभी भी हप्पा .


वह अजीब सा खबरनवीस है
उसे पता है एक दिन उसे भी
किसी रद्दी अखबार की तरह
दरकिनार कर दिया जायेगा
वह अपनी उदासी की खबर में
किसी को साझीदार नहीं बनाता .

खोया -पाया

मुझे आज अलस्सुबह पुराने दस्तावजों के बीच एक जर्द कागज मिला दर्ज थी उस पर सब्ज रंग की आधी अधूरी इबारत वह प्रेमपगी कविता नहीं थी, शायद या ...